वसंत गीत
चली वसंत बयार
महक उठी मन की फुलबगिया।
पत्र पत्र खिलते ख्वावों के
पुष्प पुष्प कोमल भावों के
भंवर करें गुंजार
महक उठी मन की फुलबगिया।
शब्द शब्द पायल की रुनझुन
चरण चरण गीतों की सरगम
कोयल करे पुकार
महक उठी मन की फुलबगिया।
वर्ण कली से शब्द फूल बन
अलंकार रस छंद धूल बन
करें भाव संचार
महक उठी मन की फुलबगिया।
छंद बने स्वछन्द महकते
ज्यों नभ में खग वृन्द चहकते
बने वाद्य के तार
महक उठी मन की फुलबगिया।।
चली वसंत बयार
महक उठी मन की फुलबगिया।
पत्र पत्र खिलते ख्वावों के
पुष्प पुष्प कोमल भावों के
भंवर करें गुंजार
महक उठी मन की फुलबगिया।
शब्द शब्द पायल की रुनझुन
चरण चरण गीतों की सरगम
कोयल करे पुकार
महक उठी मन की फुलबगिया।
वर्ण कली से शब्द फूल बन
अलंकार रस छंद धूल बन
करें भाव संचार
महक उठी मन की फुलबगिया।
छंद बने स्वछन्द महकते
ज्यों नभ में खग वृन्द चहकते
बने वाद्य के तार
महक उठी मन की फुलबगिया।।
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