मातृभाषा दिवस
आज २ १ फ़रवरी है यानि अन्तरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस। मातृभाषा यानि वह भाषा जिसे सर्वप्रथम माँ के मुंह सुनते व सीखते है। जिसका सम्बन्ध हमारी आत्मा से है। मातृभाषा हमें जान से भी अधिक प्यारी होती है। हम चाहे कहीं भी चले जाये पर इसे नहीं भूल पाते। इसके सम्मान हेतु हम प्राणों की भी परवाह नहीं करते। इसका एक ज्वलंत उदाहरण है बांग्लादेश (पहले का पुरबी पाकिस्तान). भारत विभाजन के पश्चात् पाकिस्तान दो भाग मिले - पश्चिमी पाकिस्तान व पूर्वी पाकिस्तान।
दोनों पकिस्तानो की राजधानी प. पाकिस्तान में थी। वहां की सरकार ने हुकुम दिया कि दोनों देशो की राष्ट्रभाषा उर्दू होगी। यह फरमान पूर्वी पाकिस्तान को अच्छा नहीं लगा। वहां के लोग बंगला भाषा को ही राष्ट्र भाषा बनाने के लिए संघर्ष करते रहे। अंत में १९५२ में २ १ फ़रवरी के दिन कई लोगों की जाने गई। इसके बाद संघर्ष में और तेजी आ गई। १ ९ ७ १ में बंगला देश स्वतंत्र भी हो गया। वहां की राष्ट्र भाषा बंगला बनी। अंत में १ ९ ९ ४ में यूनेस्को ने २ १ फ़रवरी को अंतर राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की।
२ १ फ़रवरी के वलिदानो की याद में एक स्मृति स्तम्भ बनाया गया।


















परियाबा में सम्मान ग्रहण करते हुए मार्तंड 