मंगलवार, 19 फ़रवरी 2013

ayo rituraj

आयो ऋतुराज 














आयो ऋतुराज 

दोहा - 
महकि महकि महुआ झरें, चहकि खग गाय।
लहक़ि लहकि लहके धरा बहकि बहकि मन जाय ।

गीत -

फूल हँसे कली खिली भौर गुनगुनाये
आयो ऋतुराज पतवा झरें।

फलियाँ छमकें बलियाँ महकें, खेलि रहीं रंगरलियाँ 

कलियन ऊपर उड़ें तितलियाँ, भरि फूलनि की डलियाँ गलियाँ, 
आयो ऋतुराज पतवा झरें।

लाल हरे पीरे खेतन में मानो फाग मनायो 

अथवा काहू चतुर चितेरे चिन चिन चौक वनायो भायो 
आयो ऋतुराज पतवा झरें।

मनजरियन को मुकुट बान्धि के झुकी आम की डाली

मधुपन के संग फागुन गावे कोयलिया मतवाली काली 
आयो ऋतुराज पतवा झरें।

गैहूँ चना मटर सरसों ने ओढि वसन्ती  साडी 

हर हराइ के अरहर बोली में न रहूंगी क्वारी वारी 
आयो ऋतुराज पतवा झरें।

पेड़न में नव किसलय फूटे रूठो साजन आयो 

दामिनिया सी कामिनिया ने नाचो शोर मचायो गायो 
आयो ऋतुराज पतवा झरें।

गली-गली में ढोलक बाजी भरि उमंग में टोली 

होली गावे रोली फैके खेले आँख मिचोली भोली 
आयो ऋतुराज पतवा झरें।

उड़त गुलाल लाल भए अम्बर रंगी रँगीली चोली 

अंटा  गोली खेले मेलें रंगोली हमजोली बोली 
आयो ऋतुराज पतवा झरें।

- कुं . वीर सिंह मार्तण्ड , संपादक - साहित्य त्रिवेणी 



1 टिप्पणी:

  1. उड़त गुलाल लाल भए अम्बर रंगी रँगीली चोली
    अंटा गोली खेले मेलें रंगोली हमजोली बोली
    आयो ऋतुराज पतवा झरें।

    क्या बात है ....!!

    बहुत सुंदर गीत ....!!

    coment box se word verification htaa lein ....

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